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mahabharat 9.3.21-22h: तब क्रोध में भरे हुए भीमसेन और द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न ने अपनी चतुरंगिणी सेना की सहायता से उन्हें तितर-बितर कर दिया और बाणों से उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  9.3.21-22h 
तान् भीमसेन: संक्रुद्धो धृष्टद्युम्नश्च पार्षत:॥ २१॥
बलेन चतुरङ्गेण परिक्षिप्याहनच्छरै:।
 
 
अनुवाद
तब क्रोध में भरे हुए भीमसेन और द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न ने अपनी चतुरंगिणी सेना की सहायता से उन्हें तितर-बितर कर दिया और बाणों से उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया।
 
Then Bhimasena and Dhrishtadyumna, son of Drupada, filled with anger, dispersed them with the help of their four-fold army and wounded them severely with arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)