श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  9.3.20-21h 
गजाश्वरथहीनास्तु पादाताश्चैव मारिष॥ २०॥
पञ्चविंशतिसाहस्रा: प्राद्रवन् शनकैरिव।
 
 
अनुवाद
माननीय महाराज! उस समय हाथी, घोड़े और रथ से रहित पच्चीस हजार पैदल सैनिक धीरे-धीरे पाण्डवों पर आक्रमण करने लगे।
 
Honorable King! At that time, twenty-five thousand infantry soldiers without elephants, horses and chariots slowly began attacking the Pandavas.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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