श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 2-4h
 
 
श्लोक  9.3.2-4h 
निहते सूतपुत्रे तु पाण्डवेन महात्मना।
विद्रुतेषु च सैन्येषु समानीतेषु चासकृत्॥ २॥
घोरे मनुष्यदेहानामाजौ नरवर क्षये।
यत्तत् कर्णे हते पार्थ: सिंहनादमथाकरोत्॥ ३॥
तदा तव सुतान् राजन् प्राविशत् सुमहद् भयम्।
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! जब महारथी पाण्डुपुत्र अर्जुन ने सारथिपुत्र कर्ण को मार डाला, तब आपकी सेनाएँ बार-बार भागकर लौटने को विवश हो गईं और युद्धस्थल में मनुष्यों का भयंकर संहार होने लगा, तब कर्ण के मारे जाने पर कुन्तीपुत्र अर्जुन ने बड़े जोर से गर्जना की। हे राजन! यह सुनकर आपके पुत्र महान् भय से भर गए॥2-3 1/2॥
 
O best of men! When the son of a charioteer, Karna, was killed by Arjuna, the son of a great Pandu, your armies were repeatedly forced to flee and return and there was a terrible massacre of human bodies on the battlefield, then after the killing of Karna, Arjuna, the son of Kunti, roared very loudly. O King! On hearing this, your sons were filled with great fear.॥2-3 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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