Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.3.16-17h: जब मैं सेना के पीछे खड़ा होकर धनुष हाथ में लेकर युद्ध करूँगा, तब कुन्तीपुत्र अर्जुन मुझे पार करके आगे नहीं बढ़ सकेगा; इसलिए तुम घोड़ों को आगे बढ़ाओ॥16 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  9.3.16-17h 
नातिक्रमिष्यते पार्थो धनुष्पाणिमवस्थितम्॥ १६॥
जघने युद्धॺमानं मां तूर्णमश्वान् प्रचोदय।
 
 
अनुवाद
जब मैं सेना के पीछे खड़ा होकर धनुष हाथ में लेकर युद्ध करूँगा, तब कुन्तीपुत्र अर्जुन मुझे पार करके आगे नहीं बढ़ सकेगा; इसलिए तुम घोड़ों को आगे बढ़ाओ॥16 1/2॥
 
When I stand at the rear of the army and fight with my bow in hand, then Kunti's son Arjuna will not be able to cross me and move ahead; therefore you drive the horses forward.॥ 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)