श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  9.3.13-14h 
व्यालतस्करसंकीर्णे सार्थहीना यथा वने॥ १३॥
तथा त्वदीया निहते सूतपुत्रे तदाभवन्।
 
 
अनुवाद
जैसे अपने साथियों से बिछड़े हुए लोग सर्पों और लुटेरों से भरे हुए वन में अनाथों की तरह भटकते हैं, वैसी ही स्थिति आपके सैनिकों की हुई, जब सारथीपुत्र कर्ण मारा गया ॥13 1/2॥
 
Just as people separated from their companions wander about like orphans in a forest infested with snakes and robbers, the same happened to your soldiers when Karna, the son of a charioteer, was killed. ॥13 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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