श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  9.3.10-11h 
अन्योन्यमभिनिघ्नन्तो वीक्षमाणा भयाद् दिश:।
मामेव नूनं बीभत्सुर्मामेव च वृकोदर:॥ १०॥
अभियातीति मन्वाना: पेतुर्मम्लुश्च भारत।
 
 
अनुवाद
वे सब-के-सब एक-दूसरे पर आक्रमण करते और भयभीत होकर सब ओर देखते हुए सोचते कि अर्जुन और भीमसेन मेरे पीछे पड़े हैं। हे भारत! ऐसा सोचकर वे अपना हर्ष और उत्साह खो देते और ठोकर खाकर गिर पड़ते॥10 1/2॥
 
All of them would attack each other and looking in all directions in fear, they would think that Arjuna and Bhimasena were after me. Bhaarat! Thinking this, they would lose their joy and enthusiasm and would stumble and fall.॥ 10 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas