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mahabharat 9.29.99-100: तुम एक लोभी, अदूरदर्शी और अंधे राजा के आधार हो । मैंने उनसे युद्ध रोकने के लिए बार-बार प्रार्थना की थी, किन्तु भगवद्कृपा से वे अपनी सुध-बुध खो बैठे थे; इसलिए उन्होंने मेरी बात नहीं मानी । आज वे संकट में पड़े हैं, बेटा ! ऐसी स्थिति में उनका साथ देने के लिए केवल तुम ही जीवित हो ॥ 99-100॥   |   mahabharat अध्याय 9.29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 99-100
 
 
श्लोक  9.29.99-100 
अन्धस्य नृपतेर्यष्टिर्लुब्धस्यादीर्घदर्शिन:॥ ९९॥
बहुशो याच्यमानस्य दैवोपहतचेतस:।
त्वमेको व्यसनार्तस्य ध्रियसे पुत्र सर्वथा॥ १००॥
 
 
अनुवाद
तुम एक लोभी, अदूरदर्शी और अंधे राजा के आधार हो । मैंने उनसे युद्ध रोकने के लिए बार-बार प्रार्थना की थी, किन्तु भगवद्कृपा से वे अपनी सुध-बुध खो बैठे थे; इसलिए उन्होंने मेरी बात नहीं मानी । आज वे संकट में पड़े हैं, बेटा ! ऐसी स्थिति में उनका साथ देने के लिए केवल तुम ही जीवित हो ॥ 99-100॥
 
You are the support of a greedy, short-sighted and blind king. I had repeatedly requested him to stop the war, but by God's grace he had lost his senses; therefore he did not listen to me. Today he is suffering from trouble, son! In this situation you are the only one alive to support him.॥ 99-100॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)