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mahabharat 9.29.91-92: युयुत्सु बोला, चाचा! राजा दुर्योधन, जिसका कुल शकुनि के द्वारा अपनी जाति, भाई और पुत्र सहित मारे जाने पर नष्ट हो गया था, वह युद्धभूमि में अपना घोड़ा छोड़कर भयभीत होकर पूर्व दिशा की ओर भाग गया।   |   mahabharat अध्याय 9.29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 91-92
 
 
श्लोक  9.29.91-92 
युयुत्सुरुवाच
निहते शकुनौ तत्र सज्ञातिसुतबान्धवे॥ ९१॥
हतशेषपरीवारो राजा दुर्योधनस्तत:।
स्वकं स हयमुत्सृज्य प्राङ्मुख: प्राद्रवद् भयात्॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
युयुत्सु बोला, चाचा! राजा दुर्योधन, जिसका कुल शकुनि के द्वारा अपनी जाति, भाई और पुत्र सहित मारे जाने पर नष्ट हो गया था, वह युद्धभूमि में अपना घोड़ा छोड़कर भयभीत होकर पूर्व दिशा की ओर भाग गया।
 
Yuyutsu said, Uncle! King Duryodhana, whose family was destroyed when Shakuni along with his caste, brother and son were killed, abandoned his horse on the battlefield and fled towards the east in fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)