Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.29.85-86h: ऐसा सोचकर बलवान युयुत्सु ने अपने विचार उनसे कहे। उनके वचन सुनकर, निरन्तर करुणा में रहने वाले बलवान राजा युधिष्ठिर अत्यन्त प्रसन्न हुए और वैश्य कन्या के पुत्र को हृदय से लगाकर विदा किया। | mahabharat अध्याय 9.29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एतमर्थं महाबाहुरुभयो: स न्यवेदयत्।
तस्य प्रीतोऽभवद् राजा नित्यं करुणवेदिता॥ ८५॥
परिष्वज्य महाबाहुर्वैश्यापुत्रं व्यसर्जयत्।
अनुवाद
ऐसा सोचकर बलवान युयुत्सु ने अपने विचार उनसे कहे। उनके वचन सुनकर, निरन्तर करुणा में रहने वाले बलवान राजा युधिष्ठिर अत्यन्त प्रसन्न हुए और वैश्य कन्या के पुत्र को हृदय से लगाकर विदा किया।
Thinking thus, the powerful Yuyutsu expressed his thoughts to them. Hearing his words, the powerful king Yudhishthira, who was constantly experiencing compassion, became very pleased and embraced the son of a Vaishya princess and sent him off. 85 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥