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mahabharat 9.29.78: जब यह भयंकर भगदड़ मच रही थी, तब शोक से अचेत युयुत्सु अपने मन में उचित कर्तव्य का चिंतन करने लगा।   |   mahabharat अध्याय 9.29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  9.29.78 
तस्मिंस्तथा वर्तमाने विद्रवे भृशदारुणे।
युयुत्सु: शोकसम्मूढ: प्राप्तकालमचिन्तयत्॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
जब यह भयंकर भगदड़ मच रही थी, तब शोक से अचेत युयुत्सु अपने मन में उचित कर्तव्य का चिंतन करने लगा।
 
When this terrible stampede was taking place, Yuyutsu, unconscious with grief, began contemplating in his mind the appropriate duty.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)