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mahabharat 9.29.63-65h: मृत्यु से बचकर आए तीनों महारथी कृपाचार्य के सुसज्जित रथ पर मुझे शिविर में ले आए। सूर्यास्त हो चुका था। शिविर के रक्षक भयभीत हो गए। आपके पुत्रों के विनाश का समाचार सुनकर वे सभी फूट-फूट कर रोने लगे। 63-64 1/2।   |   mahabharat अध्याय 9.29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 63-65h
 
 
श्लोक  9.29.63-65h 
ते तु मां रथमारोप्य कृपस्य सुपरिष्कृतम्॥ ६३॥
सेनानिवेशमाजग्मुर्हतशेषास्त्रयो रथा:।
तत्र गुल्मा: परित्रस्ता: सूर्ये चास्तमिते सति॥ ६४॥
सर्वे विचुक्रुशु: श्रुत्वा पुत्राणां तव संक्षयम्।
 
 
अनुवाद
मृत्यु से बचकर आए तीनों महारथी कृपाचार्य के सुसज्जित रथ पर मुझे शिविर में ले आए। सूर्यास्त हो चुका था। शिविर के रक्षक भयभीत हो गए। आपके पुत्रों के विनाश का समाचार सुनकर वे सभी फूट-फूट कर रोने लगे। 63-64 1/2।
 
The three charioteers who had escaped death brought me to the camp in the decorated chariot of Krupacharya. The sun had set. The guards of the camp were terrified. On hearing the news of the destruction of your sons, they all started crying bitterly. 63-64 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)