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mahabharat 9.29.45: तत्पश्चात् मैंने उन्हें युद्ध में अपने पकड़े जाने तथा व्यासजी की कृपा से जीवित छूटने का सम्पूर्ण वृत्तांत सुनाया।   |   mahabharat अध्याय 9.29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  9.29.45 
ततोऽस्मै तदहं सर्वमुक्तवान् ग्रहणं तदा।
द्वैपायनप्रसादाच्च जीवतो मोक्षमाहवे॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् मैंने उन्हें युद्ध में अपने पकड़े जाने तथा व्यासजी की कृपा से जीवित छूटने का सम्पूर्ण वृत्तांत सुनाया।
 
Thereafter I narrated to him the entire story of my being captured in the war and of my being released alive by the grace of Vyasa. 45.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)