श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  9.29.42 
क्रोशमात्रमपक्रान्तं गदापाणिमवस्थितम्।
एकं दुर्योधनं राजन्नपश्यं भृशविक्षतम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! एक मील चलने के बाद मैंने देखा कि दुर्योधन भागता हुआ अकेला हाथ में गदा लिए खड़ा है। उसके शरीर पर अनेक घाव थे।
 
King! After walking a mile I saw the fleeing Duryodhan standing alone with his mace in his hand. There were many wounds on his body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)