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mahabharat 9.29.41: उनकी आज्ञा पाकर मैंने कवच उतार दिया और सायंकाल के समय बिना किसी शस्त्र के नगर की ओर चल पड़ा। उस समय मेरा सारा शरीर रक्त से लथपथ था ॥41॥   |   mahabharat अध्याय 9.29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  9.29.41 
अनुज्ञातस्त्वहं तेन न्यस्तवर्मा निरायुध:।
प्रातिष्ठं येन नगरं सायाह्ने रुधिरोक्षित:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
उनकी आज्ञा पाकर मैंने कवच उतार दिया और सायंकाल के समय बिना किसी शस्त्र के नगर की ओर चल पड़ा। उस समय मेरा सारा शरीर रक्त से लथपथ था ॥41॥
 
Upon his command, I took off my armour and left for the city in the evening without any weapons. My whole body was soaked in blood at that time. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)