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व्यासजी के ये वचन सुनकर शिनि के पौत्र सात्यकि ने हाथ जोड़कर मुझे कारागार से मुक्त कर दिया और कहा, 'संजय! तुम्हारा कल्याण हो। जाओ और अपना अभीष्ट प्राप्त करो।'
Hearing these words of Vyasa, Satyaki, the grandson of Shini, with folded hands, released me from prison and said, 'Sanjaya! May you be blessed. Go and achieve your desired goal.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥