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mahabharat 9.29.39: उसी समय महर्षि श्रीकृष्ण द्वैपायन व्यास अचानक वहाँ पहुँचे और बोले, 'संजय को जीवित छोड़ दो। वह किसी भी प्रकार से मारे जाने योग्य नहीं है।'   |   mahabharat अध्याय 9.29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  9.29.39 
तमागम्य महाप्राज्ञ: कृष्णद्वैपायनोऽब्रवीत्।
मुच्यतां संजयो जीवन्न हन्तव्य: कथंचन॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
उसी समय महर्षि श्रीकृष्ण द्वैपायन व्यास अचानक वहाँ पहुँचे और बोले, 'संजय को जीवित छोड़ दो। वह किसी भी प्रकार से मारे जाने योग्य नहीं है।'
 
At that time the great sage Sri Krishna Dwaipayana Vyasa suddenly arrived and said, 'Leave Sanjaya alive. He is not fit to be killed in any way.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)