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mahabharat 9.29.37: उस समय मुझे बन्दी देखकर धृष्टद्युम्न ने हँसकर सात्यकि से कहा - 'उसे बन्दी बनाने से क्या लाभ? उसके जीवित रहने से हमें कोई लाभ नहीं है।'॥37॥   |   mahabharat अध्याय 9.29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  9.29.37 
धृष्टद्युम्नस्तु मां दृष्ट्वा हसन् सात्यकिमब्रवीत्।
किमनेन गृहीतेन नानेनार्थोऽस्ति जीवता॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
उस समय मुझे बन्दी देखकर धृष्टद्युम्न ने हँसकर सात्यकि से कहा - 'उसे बन्दी बनाने से क्या लाभ? उसके जीवित रहने से हमें कोई लाभ नहीं है।'॥37॥
 
At that time, seeing me imprisoned, Dhrishtadyumna laughingly said to Satyaki, 'What is the use of imprisoning him? There is no benefit to us in his being alive.'॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)