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mahabharat 9.29.31-32: महाराज! धृष्टद्युम्न आदि पाण्डवों ने अत्यन्त कुपित होकर आपकी सेना पर आक्रमण किया था और अर्जुन ने अपने गाण्डीव धनुष से शक्ति, ऋष्टि और प्रास हाथ में लेकर गर्जना करते हुए आपके योद्धाओं के समस्त संकल्पों को निष्फल कर दिया था।   |   mahabharat अध्याय 9.29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  9.29.31-32 
पाण्डवास्तु महाराज धृष्टद्युम्नपुरोगमा:।
अभ्यद्रवन्त संक्रुद्धास्तव राजन् बलं प्रति॥ ३१॥
शक्त्यृष्टिप्रासहस्तानां बलानामभिगर्जताम्।
संकल्पमकरोन्मोघं गाण्डीवेन धनंजय:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! धृष्टद्युम्न आदि पाण्डवों ने अत्यन्त कुपित होकर आपकी सेना पर आक्रमण किया था और अर्जुन ने अपने गाण्डीव धनुष से शक्ति, ऋष्टि और प्रास हाथ में लेकर गर्जना करते हुए आपके योद्धाओं के समस्त संकल्पों को निष्फल कर दिया था।
 
Maharaj! The Pandavas like Dhrishtadyumna, being very angry, had attacked your army and Arjuna had made all the resolve of your warriors, who were roaring with Shakti, Rishti and Prasa in their hands, futile with his Gandiva bow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)