vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 9: शल्य पर्व
»
अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना
»
श्लोक 15
श्लोक
9.29.15
अक्षौहिण्य: समेतास्तु तव पुत्रस्य भारत।
एकादश हता युद्धे ता: प्रभो पाण्डुसृञ्जयै:॥ १५॥
अनुवाद
हे प्रभु! भरतवंशी राजा! आपके पुत्र के पास ग्यारह अक्षौहिणी सेना थी; किन्तु युद्ध में पाण्डवों और सृंजय ने उन सबको नष्ट कर दिया॥15॥
Lord! Bharatvanshi king! Your son had eleven Akshauhini armies; But in the war, Pandavas and Srinjay destroyed them all. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×