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mahabharat 9.29.15: हे प्रभु! भरतवंशी राजा! आपके पुत्र के पास ग्यारह अक्षौहिणी सेना थी; किन्तु युद्ध में पाण्डवों और सृंजय ने उन सबको नष्ट कर दिया॥15॥   |   mahabharat अध्याय 9.29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  9.29.15 
अक्षौहिण्य: समेतास्तु तव पुत्रस्य भारत।
एकादश हता युद्धे ता: प्रभो पाण्डुसृञ्जयै:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! भरतवंशी राजा! आपके पुत्र के पास ग्यारह अक्षौहिणी सेना थी; किन्तु युद्ध में पाण्डवों और सृंजय ने उन सबको नष्ट कर दिया॥15॥
 
Lord! Bharatvanshi king! Your son had eleven Akshauhini armies; But in the war, Pandavas and Srinjay destroyed them all. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)