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mahabharat 9.28.8: हे भरतपुत्र! उन दोनों के सैकड़ों बाणों से आच्छादित आपकी सेना सर्वत्र अंधकारमय आकाश के समान दिखाई दे रही थी॥8॥   |   mahabharat अध्याय 9.28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  9.28.8 
ताभ्यां शरशतैश्छन्नं तद् बलं तव भारत।
सान्धकारमिवाकाशमभवत् तत्र तत्र ह॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! उन दोनों के सैकड़ों बाणों से आच्छादित आपकी सेना सर्वत्र अंधकारमय आकाश के समान दिखाई दे रही थी॥8॥
 
O son of Bharata! Your army, covered with hundreds of arrows of those two, appeared like a dark sky everywhere. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)