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mahabharat 9.28.6: हे प्रजानाथ! उन वीरों के धनुष और भुजाओं से छोड़े गए बाणों की वर्षा ने सम्पूर्ण दिशाओं को उसी प्रकार ढक लिया, जैसे मेघ की जलधारा सम्पूर्ण दिशाओं को ढक लेती है॥6॥   |   mahabharat अध्याय 9.28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  9.28.6 
तेषां चापभुजोत्सृष्टा शरवृष्टिर्विशाम्पते।
आच्छादयद् दिश: सर्वा धारा इव पयोमुच:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! उन वीरों के धनुष और भुजाओं से छोड़े गए बाणों की वर्षा ने सम्पूर्ण दिशाओं को उसी प्रकार ढक लिया, जैसे मेघ की जलधारा सम्पूर्ण दिशाओं को ढक लेती है॥6॥
 
O Prajanath! The shower of arrows shot by those heroes from their bows and arms covered all directions, just as the water stream of a cloud covers all directions. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)