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mahabharat 9.28.45-46h: उन सबको युद्ध में उदासीन देखकर पराक्रमी माद्रीपुत्र सहदेव ने हजारों बाणों की वर्षा करके उन्हें युद्धभूमि में ही रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  9.28.45-46h 
तान् वै विमनसो दृष्ट्वा माद्रीपुत्र: प्रतापवान्॥ ४५॥
शरैरनेकसाहस्रैर्वारयामास संयुगे।
 
 
अनुवाद
उन सबको युद्ध में उदासीन देखकर पराक्रमी माद्रीपुत्र सहदेव ने हजारों बाणों की वर्षा करके उन्हें युद्धभूमि में ही रोक दिया।
 
Seeing them all indifferent to the battle, the mighty Madri son Sahadeva stopped them on the battlefield by showering thousands of arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)