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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  9.28.44-45h 
अथोत्क्रुष्टं महच्चासीत् पाण्डवैर्जितकाशिभि:॥ ४४॥
धार्तराष्ट्रास्तत: सर्वे प्रायशो विमुखाभवन्।
 
 
अनुवाद
उस समय पाण्डवों ने विजय से प्रसन्न होकर जोर से गर्जना की। इससे आपके लगभग सभी सैनिक युद्ध से विमुख हो गये।
 
At that time the Pandavas, overjoyed with victory, roared loudly. Due to this almost all your soldiers turned away from the battle. 44 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)