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mahabharat 9.28.42-43h: वह स्वर्ण-मंडित शक्ति तीन टुकड़ों में कटकर आकाश से गिरती हुई चमकीली बिजली के समान पृथ्वी पर बिखर गई। 42 1/2   |   mahabharat अध्याय 9.28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  9.28.42-43h 
सा पपात त्रिधा च्छिन्ना भूमौ कनकभूषणा॥ ४२॥
शीर्यमाणा यथा दीप्ता गगनाद् वै शतह्रदा।
 
 
अनुवाद
वह स्वर्ण-मंडित शक्ति तीन टुकड़ों में कटकर आकाश से गिरती हुई चमकीली बिजली के समान पृथ्वी पर बिखर गई। 42 1/2
 
That golden-adorned Shakti, cut into three pieces, scattered on the earth like bright lightning falling from the sky. 42 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)