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mahabharat 9.28.34-35: भरत! अपने पुत्र को मारा गया देखकर शकुनिक का गला रुँध गया। उसने गहरी साँस ली और विदुर के वचनों को याद करने लगा। उसकी आँखों में आँसू भर आए और वह आह भरता हुआ दो घण्टों तक चिन्ता में डूबा रहा। 34-35।   |   mahabharat अध्याय 9.28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  9.28.34-35 
पुत्रं तु निहतं दृष्ट्वा शकुनिस्तत्र भारत॥ ३४॥
साश्रुकण्ठो विनि:श्वस्य क्षत्तुर्वाक्यमनुस्मरन्।
चिन्तयित्वा मुहूर्तं स बाष्पपूर्णेक्षण: श्वसन्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
भरत! अपने पुत्र को मारा गया देखकर शकुनिक का गला रुँध गया। उसने गहरी साँस ली और विदुर के वचनों को याद करने लगा। उसकी आँखों में आँसू भर आए और वह आह भरता हुआ दो घण्टों तक चिन्ता में डूबा रहा। 34-35।
 
Bharata! Seeing his son killed, Shakunika's throat became choked. He took a deep breath and started remembering Vidura's words. His eyes filled with tears and he sighed and remained immersed in worry for two hours. 34-35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)