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mahabharat 9.28.20-21h: शत्रु सेना का संहार करके भीमसेन ने बड़े जोर से गर्जना की। उनकी गर्जना से भयभीत होकर शकुनि के पीछे-पीछे चलने वाले सभी सैनिक अपने घोड़ों और हाथियों सहित अचानक भाग खड़े हुए।   |   mahabharat अध्याय 9.28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  9.28.20-21h 
विनिर्भिद्याकरोच्चैव सिंहनादमरिंदम:।
तेन शब्देन वित्रस्ता: सर्वे सहयवारणा:॥ २०॥
प्राद्रवन् सहसा भीता: शकुनेश्च पदानुगा:।
 
 
अनुवाद
शत्रु सेना का संहार करके भीमसेन ने बड़े जोर से गर्जना की। उनकी गर्जना से भयभीत होकर शकुनि के पीछे-पीछे चलने वाले सभी सैनिक अपने घोड़ों और हाथियों सहित अचानक भाग खड़े हुए।
 
After destroying the enemy army, Bhimasena roared very loudly. Terrified by his roar, all the soldiers following Shakuni, along with their horses and elephants, suddenly ran away.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)