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mahabharat 9.28.2: तब पराक्रमी सहदेव ने भी तुरंत ही आक्रमण करने वाले शकुनि पर बड़ी संख्या में तीव्र गति से चलने वाले बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी, जो टिड्डियों के दल के समान आकाश को आच्छादित कर रहे थे॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 9.28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  9.28.2 
ततोऽस्यापततस्तूर्णं सहदेव: प्रतापवान्।
शरौघान् प्रेषयामास पतङ्गानिव शीघ्रगान्॥ २॥
 
 
अनुवाद
तब पराक्रमी सहदेव ने भी तुरंत ही आक्रमण करने वाले शकुनि पर बड़ी संख्या में तीव्र गति से चलने वाले बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी, जो टिड्डियों के दल के समान आकाश को आच्छादित कर रहे थे॥ 2॥
 
Then the mighty Sahadeva also immediately began showering a large number of swift arrows on Shakuni who was attacking him, which were covering the sky like swarms of locusts.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)