Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.28.18-19: महाराज! उस आघात से व्याकुल होकर सहदेव रथ के आसन पर बैठ गये। उनकी यह दशा देखकर महाबली भीमसेन अत्यन्त क्रोधित हो गये। भरत! उन्होंने आपकी समस्त सेनाओं को आगे बढ़ने से रोक दिया और सैकड़ों-हजारों बाणों की वर्षा करके उन सबको बींध डाला। | mahabharat अध्याय 9.28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स विह्वलो महाराज रथोपस्थ उपाविशत्।
सहदेवं तथा दृष्ट्वा भीमसेन: प्रतापवान्॥ १८॥
सर्वसैन्यानि संक्रुद्धो वारयामास भारत।
निर्बिभेद च नाराचै: शतशोऽथ सहस्रश:॥ १९॥
अनुवाद
महाराज! उस आघात से व्याकुल होकर सहदेव रथ के आसन पर बैठ गये। उनकी यह दशा देखकर महाबली भीमसेन अत्यन्त क्रोधित हो गये। भरत! उन्होंने आपकी समस्त सेनाओं को आगे बढ़ने से रोक दिया और सैकड़ों-हजारों बाणों की वर्षा करके उन सबको बींध डाला।
Maharaj! Distressed by that blow, Sahadeva sat down in the chariot's seat. Seeing his condition, the mighty Bhimasena became very angry. Bhaarat! He stopped all your armies from advancing and pierced them all by showering hundreds and thousands of arrows. 18-19.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥