श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 27: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा सत्यकर्मा, सत्येषु तथा पैंतालीस पुत्रों और सेनासहित सुशर्माका वध तथा भीमके द्वारा धृतराष्ट्रपुत्र सुदर्शनका अन्त  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  9.27.57 
तत्र योधास्तदा पेतु: परस्परसमाहता:।
उभयो: सेनयो राजन् संशोचन्त: स्म बान्धवान्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय दोनों दलों के योद्धा एक-दूसरे पर प्रहार करके अपने-अपने भाइयों और सम्बन्धियों के लिए विलाप करते हुए गिर पड़े।
 
King! At that time, the warriors of both the groups fell down after being attacked by each other, mourning for their brothers and relatives.
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि सुशर्मवधे सप्तविंशोऽध्याय:॥ २७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वमें सुशर्माका वधविषयक सत्ताईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)