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mahabharat 9.27.49-51h: हे जनेश्वर! उधर क्रोधित भीमसेन ने हँसते हुए सुदर्शन पर बाणों की वर्षा करके उसे ढक लिया। फिर क्रोधपूर्वक हँसते हुए तीखे छुरे से उसका सिर काट डाला। सुदर्शन पृथ्वी पर गिरकर मर गया।   |   mahabharat अध्याय 9.27: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा सत्यकर्मा, सत्येषु तथा पैंतालीस पुत्रों और सेनासहित सुशर्माका वध तथा भीमके द्वारा धृतराष्ट्रपुत्र सुदर्शनका अन्त   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 27: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा सत्यकर्मा, सत्येषु तथा पैंतालीस पुत्रों और सेनासहित सुशर्माका वध तथा भीमके द्वारा धृतराष्ट्रपुत्र सुदर्शनका अन्त  »  श्लोक 49-51h
 
 
श्लोक  9.27.49-51h 
भीमस्तु समरे क्रुद्ध: पुत्रं तव जनाधिप॥ ४९॥
सुदर्शनमदृश्यं तं शरैश्चक्रे हसन्निव।
ततोऽस्य प्रहसन् क्रुद्ध: शिर: कायादपाहरत्॥ ५०॥
क्षुरप्रेण सुतीक्ष्णेन स हत: प्रापतद् भुवि।
 
 
अनुवाद
हे जनेश्वर! उधर क्रोधित भीमसेन ने हँसते हुए सुदर्शन पर बाणों की वर्षा करके उसे ढक लिया। फिर क्रोधपूर्वक हँसते हुए तीखे छुरे से उसका सिर काट डाला। सुदर्शन पृथ्वी पर गिरकर मर गया।
 
O Janeshwar! On the other hand, enraged Bhimasena, laughingly, showered arrows on Sudarshan and covered him. Then, laughing angrily, he cut off his head with a sharp razor. Sudarshan fell dead on the earth. 49-50 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)