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mahabharat 9.27.45-46h: क्रोध से आगबबूला हुए धनुर्धर अर्जुन द्वारा छोड़ा गया बाण सुशर्मा की छाती में लगा और उसमें जा लगा।   |   mahabharat अध्याय 9.27: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा सत्यकर्मा, सत्येषु तथा पैंतालीस पुत्रों और सेनासहित सुशर्माका वध तथा भीमके द्वारा धृतराष्ट्रपुत्र सुदर्शनका अन्त   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 27: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा सत्यकर्मा, सत्येषु तथा पैंतालीस पुत्रों और सेनासहित सुशर्माका वध तथा भीमके द्वारा धृतराष्ट्रपुत्र सुदर्शनका अन्त  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  9.27.45-46h 
स शर: प्रेषितस्तेन क्रोधदीप्तेन धन्विना॥ ४५॥
सुशर्माणं समासाद्य बिभेद हृदयं रणे।
 
 
अनुवाद
क्रोध से आगबबूला हुए धनुर्धर अर्जुन द्वारा छोड़ा गया बाण सुशर्मा की छाती में लगा और उसमें जा लगा।
 
The arrow fired by the archer Arjun, furious with anger, hit Susharma and pierced his chest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)