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mahabharat 9.27.44-45h: तत्पश्चात् उन्होंने यम की गदा के समान भयंकर बाण हाथ में लेकर सुशर्मा पर निशाना साधा और मुस्कराते हुए उसे शीघ्रता से छोड़ दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.27: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा सत्यकर्मा, सत्येषु तथा पैंतालीस पुत्रों और सेनासहित सुशर्माका वध तथा भीमके द्वारा धृतराष्ट्रपुत्र सुदर्शनका अन्त   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 27: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा सत्यकर्मा, सत्येषु तथा पैंतालीस पुत्रों और सेनासहित सुशर्माका वध तथा भीमके द्वारा धृतराष्ट्रपुत्र सुदर्शनका अन्त  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  9.27.44-45h 
तत: शरं समादाय यमदण्डोपमं तदा॥ ४४॥
सुशर्माणं समुद्दिश्य चिक्षेपाशु हसन्निव।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन्होंने यम की गदा के समान भयंकर बाण हाथ में लेकर सुशर्मा पर निशाना साधा और मुस्कराते हुए उसे शीघ्रता से छोड़ दिया।
 
Thereafter, taking in his hand an arrow as dreadful as the mace of Yama, he aimed at Susarma and while smiling quickly released it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)