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mahabharat 9.27.25-26h: वृष्णिनन्दन श्रीकृष्ण! यदि वह मेरे भय से युद्ध से भाग न जाए, तो उस मूर्ख दुर्योधन को मेरे द्वारा मारा हुआ समझो।   |   mahabharat अध्याय 9.27: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा सत्यकर्मा, सत्येषु तथा पैंतालीस पुत्रों और सेनासहित सुशर्माका वध तथा भीमके द्वारा धृतराष्ट्रपुत्र सुदर्शनका अन्त   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 27: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा सत्यकर्मा, सत्येषु तथा पैंतालीस पुत्रों और सेनासहित सुशर्माका वध तथा भीमके द्वारा धृतराष्ट्रपुत्र सुदर्शनका अन्त  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  9.27.25-26h 
नापयाति भयात् कृष्ण संग्रामाद् यदि चेन्मम॥ २५॥
निहतं विद्धि वार्ष्णेय धार्तराष्ट्रं सुबालिशम्।
 
 
अनुवाद
वृष्णिनन्दन श्रीकृष्ण! यदि वह मेरे भय से युद्ध से भाग न जाए, तो उस मूर्ख दुर्योधन को मेरे द्वारा मारा हुआ समझो।
 
Vrishninandan Sri Krishna! If he does not flee from the battle out of fear of me, then consider that foolish Duryodhan killed by me. 25 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)