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mahabharat 9.27.22-23h: मैं उन सभी रत्नों को वापस ले लूँगा जिन्हें सुबल के पुत्र दुष्ट शकुनि ने जुआघर में छल करके चुरा लिया था।   |   mahabharat अध्याय 9.27: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा सत्यकर्मा, सत्येषु तथा पैंतालीस पुत्रों और सेनासहित सुशर्माका वध तथा भीमके द्वारा धृतराष्ट्रपुत्र सुदर्शनका अन्त   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 27: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा सत्यकर्मा, सत्येषु तथा पैंतालीस पुत्रों और सेनासहित सुशर्माका वध तथा भीमके द्वारा धृतराष्ट्रपुत्र सुदर्शनका अन्त  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  9.27.22-23h 
निकृत्या वै दुराचारो यानि रत्नानि सौबल:॥ २२॥
सभायामहरद् द्यूते पुनस्तान्याहराम्यहम्।
 
 
अनुवाद
मैं उन सभी रत्नों को वापस ले लूँगा जिन्हें सुबल के पुत्र दुष्ट शकुनि ने जुआघर में छल करके चुरा लिया था।
 
I will take back all the gems which the wicked Shakuni, son of Subala, had stolen by cheating in the gambling hall.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)