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mahabharat 9.27.18-19: निश्चय ही इस पृथ्वी पर किसी को भी मृत्यु से मुक्ति नहीं मिलती, इसीलिए अपनी सेना के नष्ट हो जाने पर भी दुर्योधन युद्ध के लिए डटा हुआ है, उसे देखिये। आज महाराज युधिष्ठिर शत्रुविहीन होंगे।   |   mahabharat अध्याय 9.27: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा सत्यकर्मा, सत्येषु तथा पैंतालीस पुत्रों और सेनासहित सुशर्माका वध तथा भीमके द्वारा धृतराष्ट्रपुत्र सुदर्शनका अन्त   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 27: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा सत्यकर्मा, सत्येषु तथा पैंतालीस पुत्रों और सेनासहित सुशर्माका वध तथा भीमके द्वारा धृतराष्ट्रपुत्र सुदर्शनका अन्त  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  9.27.18-19 
मोक्षो न नूनं कालात् तु विद्यते भुवि कस्यचित्॥ १८॥
तथा विनिहते सैन्ये पश्य दुर्योधनं स्थितम्।
अद्याह्ना हि महाराजो हतामित्रो भविष्यति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
निश्चय ही इस पृथ्वी पर किसी को भी मृत्यु से मुक्ति नहीं मिलती, इसीलिए अपनी सेना के नष्ट हो जाने पर भी दुर्योधन युद्ध के लिए डटा हुआ है, उसे देखिये। आज महाराज युधिष्ठिर शत्रुविहीन होंगे।
 
Certainly no one on this earth gets freedom from death, that is why even after the destruction of his army, Duryodhan is still standing for the war, see him. Today Maharaj Yudhishthir will be without enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)