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mahabharat 9.27.11: दुर्योधन सोचता है कि मैं युद्धभूमि में आपकी सम्पूर्ण सेना का विनाश करके पाण्डवों को पराजित कर दूँगा।’ इसीलिए वह अत्यंत भयंकर रूप धारण कर रहा है।   |   mahabharat अध्याय 9.27: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा सत्यकर्मा, सत्येषु तथा पैंतालीस पुत्रों और सेनासहित सुशर्माका वध तथा भीमके द्वारा धृतराष्ट्रपुत्र सुदर्शनका अन्त   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 27: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा सत्यकर्मा, सत्येषु तथा पैंतालीस पुत्रों और सेनासहित सुशर्माका वध तथा भीमके द्वारा धृतराष्ट्रपुत्र सुदर्शनका अन्त  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  9.27.11 
हत्वा तव बलं सर्वं संग्रामे धृतराष्ट्रज:।
जितान् पाण्डुसुतान् मत्वा रूपं धारयते महत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन सोचता है कि मैं युद्धभूमि में आपकी सम्पूर्ण सेना का विनाश करके पाण्डवों को पराजित कर दूँगा।’ इसीलिए वह अत्यंत भयंकर रूप धारण कर रहा है।
 
Duryodhana thinks that I will defeat the Pandavas by destroying your entire army in the battlefield.' That is why he is assuming a very fierce form.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)