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mahabharat 9.27.10: आपकी सेना में से कोई पांचाल नरेश धृष्टद्युम्न के पास जाकर कहे, "कृपया शीघ्र चलें।" पिताश्री! यह पापी दुर्योधन अब भाग नहीं सकता, क्योंकि इसकी सारी सेना थक गई है।   |   mahabharat अध्याय 9.27: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा सत्यकर्मा, सत्येषु तथा पैंतालीस पुत्रों और सेनासहित सुशर्माका वध तथा भीमके द्वारा धृतराष्ट्रपुत्र सुदर्शनका अन्त   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 27: श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत, अर्जुनद्वारा सत्यकर्मा, सत्येषु तथा पैंतालीस पुत्रों और सेनासहित सुशर्माका वध तथा भीमके द्वारा धृतराष्ट्रपुत्र सुदर्शनका अन्त  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  9.27.10 
यातु कश्चित्तु पाञ्चाल्यं क्षिप्रमागम्यतामिति।
परिश्रान्तबलस्तात नैष मुच्येत किल्बिषी॥ १०॥
 
 
अनुवाद
आपकी सेना में से कोई पांचाल नरेश धृष्टद्युम्न के पास जाकर कहे, "कृपया शीघ्र चलें।" पिताश्री! यह पापी दुर्योधन अब भाग नहीं सकता, क्योंकि इसकी सारी सेना थक गई है।
 
Someone from your army should go to the Panchala king Dhrishtadyumna and say, "Please move quickly." Father! This sinful Duryodhana cannot escape now, because his entire army is tired.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)