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mahabharat 9.26.31-32h: हे राजन! रथहीन होकर श्रुतर्वण ने अपनी ढाल और तलवार हाथ में ले ली। वे सौ अर्धचंद्राकार चिह्नों वाली ढाल और चमकती हुई तलवार लिए हुए थे, तभी पाण्डुपुत्र भीमसेन ने छुरे से उनका सिर काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 9.26: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका और बहुत-सी चतुरंगिणी सेनाका वध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 26: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका और बहुत-सी चतुरंगिणी सेनाका वध  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  9.26.31-32h 
श्रुतर्वा विरथो राजन्नाददे खड्गचर्मणी।
अथास्याददत: खड्गं शतचन्द्रं च भानुमत्॥ ३१॥
क्षुरप्रेण शिर: कायात् पातयामास पाण्डव:।
 
 
अनुवाद
हे राजन! रथहीन होकर श्रुतर्वण ने अपनी ढाल और तलवार हाथ में ले ली। वे सौ अर्धचंद्राकार चिह्नों वाली ढाल और चमकती हुई तलवार लिए हुए थे, तभी पाण्डुपुत्र भीमसेन ने छुरे से उनका सिर काट डाला।
 
King! Being without a chariot, Shrutarvana took his shield and sword in his hands. He was holding the shield having hundred crescent shaped marks and the sword shining with its radiance when Pandu's son Bhimasena cut off his head with a razor.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)