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mahabharat 9.26.17: उस भाले के प्रहार से रथियों में श्रेष्ठ दुर्विमोचन अपने रथ से उतरकर भूमि पर गिर पड़े, मानो पर्वत की चोटी पर उगने वाला वृक्ष वायु के वेग से टूटकर गिर पड़ा हो।   |   mahabharat अध्याय 9.26: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका और बहुत-सी चतुरंगिणी सेनाका वध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 26: भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका और बहुत-सी चतुरंगिणी सेनाका वध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  9.26.17 
स हत: प्रापतद् भूमौ स्वरथाद् रथिनां वर:।
गिरेस्तु कूटजो भग्नो मारुतेनेव पादप:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उस भाले के प्रहार से रथियों में श्रेष्ठ दुर्विमोचन अपने रथ से उतरकर भूमि पर गिर पड़े, मानो पर्वत की चोटी पर उगने वाला वृक्ष वायु के वेग से टूटकर गिर पड़ा हो।
 
Durvimochan, the best of charioteers, being struck by that spear, fell from his chariot to the ground, as if a tree growing on the top of a mountain had been broken and fell down by the force of the wind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)