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mahabharat 9.25.9-10h: अर्जुन के बाणों से घायल होकर अनेक लोग युद्धभूमि में पड़े हुए हांफते हुए दिखाई देते थे। अन्य लोग उन्हें अपने रथों में बिठाते, कुछ क्षण के लिए उन्हें आश्वस्त करते, विश्राम करते, अपनी प्यास बुझाते और फिर पुनः युद्ध के लिए प्रस्थान करते।   |   mahabharat अध्याय 9.25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  9.25.9-10h 
नि:श्वसन्ति स्म दृश्यन्ते पार्थबाणहता नरा:।
तानन्ये रथमारोप्य ह्याश्वास्य च मुहूर्तकम्॥ ९॥
विश्रान्ताश्च वितृष्णाश्च पुनर्युद्धाय जग्मिरे।
 
 
अनुवाद
अर्जुन के बाणों से घायल होकर अनेक लोग युद्धभूमि में पड़े हुए हांफते हुए दिखाई देते थे। अन्य लोग उन्हें अपने रथों में बिठाते, कुछ क्षण के लिए उन्हें आश्वस्त करते, विश्राम करते, अपनी प्यास बुझाते और फिर पुनः युद्ध के लिए प्रस्थान करते।
 
Many people were seen lying on the battlefield gasping for breath after being wounded by Arjun's arrows. Other people would seat them in their chariots, reassure them for a few moments, rest themselves, quench their thirst and then go for the battle again. 9 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)