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mahabharat 9.25.63: वह धृष्टद्युम्न का सामना छोड़कर शकुनि के पास गया। वह व्याकुल था क्योंकि उसे वर्तमान नरसंहार में राजा दुर्योधन दिखाई नहीं दे रहा था।   |   mahabharat अध्याय 9.25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  9.25.63 
परित्यज्य च पाञ्चाल्यं प्रयाता यत्र सौबल:।
राज्ञोऽदर्शनसंविग्ना वर्तमाने जनक्षये॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
वह धृष्टद्युम्न का सामना छोड़कर शकुनि के पास गया। वह व्याकुल था क्योंकि उसे वर्तमान नरसंहार में राजा दुर्योधन दिखाई नहीं दे रहा था।
 
He left facing Dhrishtadyumna and went to where Shakuni was. He was agitated as he did not see King Duryodhana in the present carnage.
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि दुर्योधनापयाने पञ्चविंशोऽध्याय:॥ २५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वमें दुर्योधनका पलायनविषयक पचीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)