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mahabharat 9.25.59-60h: चारों ओर विशाल हाथी पड़े थे, जो भीमसेन और अर्जुन के प्रहारों से कुचले जा रहे थे। उनके कारण पांडवों के लिए आगे बढ़ना बहुत कठिन हो गया था।   |   mahabharat अध्याय 9.25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना  »  श्लोक 59-60h
 
 
श्लोक  9.25.59-60h 
अभिपिष्टैर्महानागै: समन्तात् पर्वतोपमै:॥ ५९॥
नातिप्रसिद्धैव गति: पाण्डवानामजायत।
 
 
अनुवाद
चारों ओर विशाल हाथी पड़े थे, जो भीमसेन और अर्जुन के प्रहारों से कुचले जा रहे थे। उनके कारण पांडवों के लिए आगे बढ़ना बहुत कठिन हो गया था।
 
There were huge elephants lying all around which were crushed by the blows of Bhimasena and Arjun. Due to them, it had become very difficult for the Pandavas to proceed further.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)