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mahabharat 9.25.57-58h: वहाँ दो घण्टे तक घोर एवं भयानक युद्ध हुआ। पराक्रमी सात्यकि ने मेरे समस्त युद्ध-सामग्री नष्ट कर दी और जब मैं मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़ा, तब उसने मुझे जीवित ही पकड़ लिया।   |   mahabharat अध्याय 9.25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना  »  श्लोक 57-58h
 
 
श्लोक  9.25.57-58h 
तत्र युद्धमभूद् घोरं मुहूर्तमतिदारुणम्।
सात्यकिस्तु महाबाहुर्मम हत्वा परिच्छदम्॥ ५७॥
जीवग्राहमगृह्णान्मां मूर्च्छितं पतितं भुवि।
 
 
अनुवाद
वहाँ दो घण्टे तक घोर एवं भयानक युद्ध हुआ। पराक्रमी सात्यकि ने मेरे समस्त युद्ध-सामग्री नष्ट कर दी और जब मैं मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़ा, तब उसने मुझे जीवित ही पकड़ लिया।
 
There a fierce and terrible battle took place for two hours. The powerful Satyaki destroyed all my war equipment and when I fainted and fell on the ground, he caught me alive. 57 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)