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mahabharat 9.25.56: मैं अपने वाहन लेकर चलने वाले और थके हुए धृष्टद्युम्न से किसी प्रकार बचकर नरक में गिरे हुए पापी के समान सात्यकि की सेना में उतरा ॥56॥   |   mahabharat अध्याय 9.25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  9.25.56 
धृष्टद्युम्नादहं मुक्त: कथंचिच्छ्रान्तवाहनात्।
पतितो माधवानीकं दुष्कृती नरकं यथा॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
मैं अपने वाहन लेकर चलने वाले और थके हुए धृष्टद्युम्न से किसी प्रकार बचकर नरक में गिरे हुए पापी के समान सात्यकि की सेना में उतरा ॥56॥
 
Having somehow escaped from Dhrishtadyumna, who was carrying his vehicles and was tired, I landed in Satyaki's army like a sinner who had fallen into hell. ॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)