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mahabharat 9.25.55: तभी मैंने देखा कि महाबली सात्यकि मेरी ओर आ रहे हैं। वीर सात्यकि ने चार सौ रथियों के साथ युद्धभूमि में मुझ पर आक्रमण कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  9.25.55 
अथापश्यं सात्यकिं तमुपायान्तं महारथम्।
रथैश्चतु:शतैर्वीरो मामभ्यद्रवदाहवे॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
तभी मैंने देखा कि महाबली सात्यकि मेरी ओर आ रहे हैं। वीर सात्यकि ने चार सौ रथियों के साथ युद्धभूमि में मुझ पर आक्रमण कर दिया।
 
Just then I saw the mighty warrior Satyaki approaching me. The valiant Satyaki attacked me on the battlefield with four hundred charioteers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)