vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 9: शल्य पर्व
»
अध्याय 25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना
»
श्लोक 50
श्लोक
9.25.50
दृष्ट्वा तु तानापतत: सम्प्रहृष्टान् महारथान्।
पराक्रान्तास्ततो वीरा निराशा जीविते तदा॥ ५०॥
अनुवाद
उन महारथियों को हर्ष और उत्साह में भरकर आक्रमण करते देख, आपके वीर योद्धाओं ने तब जीने की आशा छोड़ दी ॥50॥
Seeing those great warriors attacking while being filled with joy and enthusiasm, your valiant warriors then lost hope of living. ॥ 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×