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mahabharat 9.25.50: उन महारथियों को हर्ष और उत्साह में भरकर आक्रमण करते देख, आपके वीर योद्धाओं ने तब जीने की आशा छोड़ दी ॥50॥   |   mahabharat अध्याय 9.25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  9.25.50 
दृष्ट्वा तु तानापतत: सम्प्रहृष्टान् महारथान्।
पराक्रान्तास्ततो वीरा निराशा जीविते तदा॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
उन महारथियों को हर्ष और उत्साह में भरकर आक्रमण करते देख, आपके वीर योद्धाओं ने तब जीने की आशा छोड़ दी ॥50॥
 
Seeing those great warriors attacking while being filled with joy and enthusiasm, your valiant warriors then lost hope of living. ॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)