श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना  »  श्लोक 47-48
 
 
श्लोक  9.25.47-48 
श्रुत्वा तु वचनं तेषामश्वत्थामा महाबल:।
भित्त्वा पाञ्चालराजस्य तदनीकं दुरुत्सहम्॥ ४७॥
कृपश्च कृतवर्मा च प्रययौ यत्र सौबल:।
रथानीकं परित्यज्य शूरा: सुदृढधन्विन:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
उनके वचन सुनकर महाबली अश्वत्थामा, कृपाचार्य और कृतवर्मा, ये सभी धनुर्धर और वीर योद्धा पांचालराज की विशाल सेना को तोड़कर अपने रथों को त्यागकर उस स्थान पर चले गये, जहाँ शकुनि था।
 
On hearing his words, the mighty Ashvatthama, Krupacharya and Kritavarma, all these strong archers and valiant warriors broke the formation of the formidable army of the King of Panchalas, abandoned their chariots and went to the place where Shakuni was.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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