श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना  »  श्लोक 45-46
 
 
श्लोक  9.25.45-46 
ते क्षत्रिया: क्षतैर्गात्रैर्हतभूयिष्ठवाहना:।
शरै: सम्पीडॺमानास्तु नातिव्यक्तमथाब्रुवन्॥ ४५॥
इदं सर्वं बलं हन्मो येन स्म परिवारिता:।
एते सर्वे गजान् हत्वा उपयान्ति स्म पाण्डवा:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ युद्ध कर रहे क्षत्रियों के अधिकांश वाहन नष्ट हो गए थे। उनके शरीर क्षत-विक्षत हो रहे थे। बाणों से आहत होकर वे अस्पष्ट वाणी में बोले - 'आओ, हम अपनी सारी सेना को मार डालें, जिससे हम घिरे हुए हैं। ये सब पाण्डव हाथी सेना को मारकर हमारी ओर आ रहे हैं।'॥45-46॥
 
Most of the vehicles of the Kshatriyas who were fighting there were destroyed. Their bodies were being mutilated. Hurt by the arrows, they spoke in an unclear voice - 'Let us kill the whole army that we are surrounded with. All these Pandavas are coming towards us after killing the elephant army.'॥ 45-46॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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