श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  9.25.30-31h 
भीमसेनस्तु तान् दृष्ट्वा नागान् मत्तगजोपम:।
करेणादाय महतीं गदामभ्यपतद् बली॥ ३०॥
अथाप्लुत्य रथात् तूर्णं दण्डपाणिरिवान्तक:।
 
 
अनुवाद
उन हाथियों को आते देख उन्मत्त हाथी के समान पराक्रमी भीमसेन तुरन्त अपने रथ से कूद पड़े और हाथ में एक विशाल गदा लेकर उन पर ऐसे टूट पड़े, जैसे यमराज दंड धारण किये हुए हों।
 
On seeing these elephants approaching, Bhimasena, as valiant as a mad elephant, immediately jumped from his chariot and attacked them with a huge mace in his hand, like Yamaraja holding a stick.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)